लोरमी -जनपद पंचायत लोरमी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भस्करा में विकास कार्यों के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना और 15वें वित्त आयोग की राशि में भारी अनियमितता बरतते हुए बिना जमीनी स्तर पर काम किए ही लाखों रुपयों का आहरण (निकालना) कर लिया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत लोरमी को सौंपी गई एक आधिकारिक जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट में इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है, जिसके बाद अब दोषी सरपंच और सचिव से राशि वसूली की अनुशंसा की गई है।
कागजों पर खोद डाले बोर, बिना काम किए डकार गए राशि
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आश्रित ग्राम खैराखुर्द में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा 3 नए बोर खनन और सबमर्सिबल पंप स्थापना की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए बकायदा अग्रिम राशि भी जारी कर दी गई थी, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत मिली:
- रूपचंद के घर के पास: 1,00,000 रुपये की लागत से हैंडपंप खनन स्वीकृत था, जो खोदा ही नहीं गया।
- मंगलू के घर के पास: 1,63,000 रुपये की लागत से बोर खनन होना था, जो पूरी तरह नदारद मिला।
- सतनाम भवन परिसर के पास: 1,63,000 रुपये की राशि से मोटर पंप ओवरहेड का काम होना था, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
इतना ही नहीं, खैराखुर्द में सतनाम भवन परिसर में 4,12,000 रुपये की लागत से होने वाले कांक्रीटीकरण कार्य को भी शुरू नहीं किया गया, जबकि इसकी राशि पहले ही आहरित कर ली गई।
बैंक खाते से नियम विरुद्ध निकाला कैश, 15वें वित्त की राशि भी गायब
जांच में यह भी पाया गया कि ग्राम पंचायत भस्करा के पीएनबी (PNB) सारधा खाता क्रमांक 23332 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रथम किस्त के रूप में 8,08,400 रुपये जमा हुए थे। इस राशि को दिनांक 10 मार्च 2026 को प्रस्ताव क्रमांक 10 पारित कर नकद (कैश) आहरण कर लिया गया, जो कि वित्तीय नियमों के तहत पूरी तरह आपत्तिजनक और अनियमितता को प्रदर्शित करता है। इसके साथ ही 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का भी पंचायत में कोई उपयोग नहीं किया गया और उसे भी सरपंच द्वारा आहरित कर गबन कर लिया गया।
बचाव में सरपंच ने दिया ‘विवाद’ का हवाला
जांच अधिकारी के समक्ष बयान देते हुए ग्राम पंचायत भस्करा के सरपंच श्री अनुप दास कुर्रे ने माना कि उन्होंने निर्माण सामग्री खरीदने के नाम पर अग्रिम राशि का आहरण किया था। उन्होंने काम न होने के पीछे अजीब तर्क देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत 3 बोर खनन कार्य स्थलों को लेकर स्थानीय स्तर पर ‘विवाद’ चल रहा है, जिसके संशोधन के लिए आदिम जाति विकास विभाग मुंगेली को पत्र भेजा गया है। हालांकि, अधिकारी उनके इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे क्योंकि बिना काम के ही शासकीय राशि निकाल ली गई थी।
जांच अधिकारियों का निष्कर्ष: सरपंच-सचिव से होगी वसूली
मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम—जिसमें सहायक विकास विस्तार अधिकारी (AVEO) सूरज कुमार नेताम, उपअभियंता (Sub Engineer) सतीश साहू और विकास विस्तार अधिकारी (VEO) विक्रम सिंह ठाकुर शामिल थे—ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला है।
जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में संयुक्त रूप से कहा है कि “3 बोर खनन कार्य की 40 प्रतिशत अग्रिम राशि, जो कुल 1,70,400 रुपये (एक लाख सत्तर हजार चार सौ रुपये) बनती है, उसे कार्य एजेंसी यानी सरपंच और सचिव से वसूल किया जाना ही उचित होगा।”

