अरपा नदी में अवैध रेत खनन पर बिलासपुर कोर्ट की ऐतिहासिक व सख्त टिप्पणी; आरोपी को 3 साल की जेल
जब आखिरी पेड़ कट जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी और आखिरी मछली पकड़ ली जाएगी, तब इंसानों को अहसास होगा कि वे पैसों को खा नहीं सकते।”
बिलासपुर-छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में विशेष न्यायालय ने पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के खिलाफ एक बेहद कड़ा और मिसाल पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अरपा नदी में अवैध रेत उत्खनन (Sand Mining) के एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरेशी ने आरोपी को 3 साल के कठोर कारावास (Rigid Imprisonment) और जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जैव विविधता (Biodiversity) को नष्ट करना सीधे तौर पर ईश्वर की रचना की अखंडता पर हमला करने जैसा है।
अदालत की वो टिप्पणियां, जिन्होंने अंतरात्मा को झकझोर दिया
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश ने पर्यावरण और प्रकृति के विनाश पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने अमेरिका की आदिम जनजाति की एक बेहद प्रसिद्ध कहावत का हवाला देते हुए कहा:
“जब आखिरी पेड़ कट जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी और आखिरी मछली पकड़ ली जाएगी, तब इंसानों को अहसास होगा कि वे पैसों को खा नहीं सकते।”
न्यायालय ने तल्ख लहजे में कहा कि अवैध रेत खनन से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इससे जल स्तर और जल प्रवाह भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। यह पूरी मानव जाति के साथ-साथ ‘भावी पीढ़ी के न्याय’ के सिद्धांत का भी खुला उल्लंघन है। खनिज संपदा राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसे सार्वजनिक हित के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
3 साल का कठोर कारावास और भारी जुर्माना
तमाम गवाहों, कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों पर गहराई से विचार करने के बाद, विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरेशी ने आरोपी कुंवर सिंह कंवर (पिता रामशरण सिंह, निवासी सल्का, थाना कोटा) को दोषी करार दिया।
- सजा: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के अंतर्गत 03 वर्ष का कठोर कारावास।
- अर्थदंड: ₹1,000/- का जुर्माना (न चुकाने पर अतिरिक्त जेल)।
- अतिरिक्त जुर्माना: छत्तीसगढ़ गैर-खनिज नियम 2015 और खान एवं खनिज अधिनियम के उल्लंघन पर ₹25,000/- का अर्थदंड भी लगाया गया है।
- जब्ती के आदेश: कोर्ट ने प्रकरण में जब्त की गई अवैध रेत को राज्य शासन के पक्ष में राजसात (Confiscate) करने के भी आदेश दिए हैं।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन कहानी के अनुसार, यह पूरा मामला कोटा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सल्का का है। 17 जून 2025 की सुबह आरोपी कुंवर सिंह कंवर बिना किसी वैध दस्तावेज या रॉयल्टी पास के अरपा नदी से अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन कर रहा था, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई की गई।
अदालत ने साफ कर दिया है कि प्रकृति की संपत्ति चुराने वाले और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

