कांकेर/रायपुर -बस्तर के रेल इतिहास में आज एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आजादी के 79 साल बाद, अबूझमाड़ की दहलीज माने जाने वाले रावघाट से राजधानी रायपुर तक सीधी यात्री ट्रेन सेवा शुरू होने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस ऐतिहासिक ‘ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन’ का लोकार्पण करेंगे।
इसके साथ ही, वे ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन को रावघाट तक विस्तार देने के लिए हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम में अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सेवा का भी शुभारंभ किया जाएगा।
112 साल बाद सच हुआ सपना
इतिहास के पन्नों को पलटें तो ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1914 में अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे कराया था। उसके बाद कई योजनाएं बनीं, लेकिन रावघाट तक रेल पहुंचने में एक सदी से ज्यादा (112 वर्ष) का समय लग गया। 95 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को बिछाने के लिए सुरक्षाकर्मियों और श्रमिकों ने भारी कीमत चुकाई है। नक्सली हमलों में तीन सुरक्षाकर्मी और चार श्रमिक शहीद हुए, जिनकी शहादत के बाद यह सपना साकार हो सका है।
6 चरणों में तय हुआ दल्लीराजहरा से रावघाट (95 किमी) का सफर
यह रेल लाइन साल 2015 से लेकर 2026 तक कुल छह चरणों में पूरी की गई है:
- 2015: दल्लीराजहरा से गुदुम (17 किमी)
- 2018: गुदुम से भानुप्रतापपुर (17 किमी)
- 2019: भानुप्रतापपुर से केवटी (8 किमी)
- 2020: केवटी से अंतागढ़ (18 किमी)
- 2023: अंतागढ़ से ताड़ोकी (17 किमी)
- 2026: ताड़ोकी से रावघाट (18 किमी)
- कुल लंबाई: 95 किलोमीटर
नक्सली चुनौती: हर 5 किमी पर सुरक्षा कैंप, रोज सिर्फ 6 घंटे काम
दल्लीराजहरा से रावघाट तक का यह निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील रहा। नक्सलियों के गढ़ में काम करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। निर्माण अमले की सुरक्षा के लिए हर पांच किलोमीटर पर एक सुरक्षा कैंप बनाया गया। भारी खतरे और नक्सली दहशत के कारण साइट पर रोजाना केवल 5 से 6 घंटे ही काम हो पाता था। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच ट्रैक का काम पूरा किया गया।
इस ऐतिहासिक शुरुआत के मायने और असर
- सुरक्षा कवच का टूटना: अबूझमाड़, जो अब तक नक्सलियों का सबसे बड़ा सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, वहां ट्रेन पहुंचने से यह इलाका सीधे बाहरी दुनिया से जुड़ जाएगा।
- यातायात में बड़ी राहत: रावघाट और अबूझमाड़ सीमा से लगे गांवों के लोगों को अब राजधानी रायपुर आने-जाने के लिए बसों या निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें सस्ता और सुलभ यातायात मिलेगा।
- अर्थव्यवस्था को मजबूती: स्थानीय ग्रामीणों को महुआ, इमली, हर्रा जैसी वनोपज और कृषि उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
- भिलाई स्टील प्लांट को लाइफलाइन: यह ट्रैक भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दल्लीराजहरा में लौह अयस्क (Iron Ore) खत्म हो रहा है। अब स्टील प्लांट को रावघाट से कच्चे माल की आपूर्ति की जाएगी।
बस्तर में रेल विस्तार के अगले बड़े प्रोजेक्ट्स
- अगला लक्ष्य (रावघाट-जगदलपुर): रावघाट तक रेल पहुंचने के बाद अब अगला पड़ाव इसे जगदलपुर से जोड़ना है। इसके लिए 3,513 करोड़ रुपये की लागत से 140 किलोमीटर लंबी पटरी बिछाई जाएगी। इस मार्ग के पूरा होने पर रायपुर से जगदलपुर तक सीधी रेल सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
- धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन: कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई होते हुए जगदलपुर तक वैकल्पिक रेल मार्ग विकसित करने की योजना है।
- केके लाइन का दोहरीकरण: कोत्तावालसा-किरंदुल रेल मार्ग पर दोहरीकरण का काम चल रहा है, जिससे लौह अयस्क और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी।
इन 13 स्टेशनों का संचालन है प्रस्तावित
भविष्य में इस पूरे रूट पर रावघाट, नारायणपुर, चांदगांव, बारोंदा, जुगानी, कोंडागांव, बानियागांव, दहीकोंगा, भानपुरी, सोनारपाल, बस्तर, कुड़कानार और जगदलपुर स्टेशनों का संचालन प्रस्तावित है।

