BREAKING: छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग के ‘निजीकरण’ के खिलाफ बड़ा बवाल; 1193 करोड़ के टेंडर का बहिष्कार, कल से भूख हड़ताल

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बिलासपुर/मुंगेली-छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा जारी ₹1,193.46 करोड़ के एकीकृत (क्लब्ड) टेंडर के विरोध में प्रदेश के स्थानीय विद्युत ठेकेदारों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने आज से इस महा-टेंडर की प्रक्रिया का पूरी तरह से बहिष्कार करने और कल, 27 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। स्थानीय ठेकेदार निलेश कुमार वैष्णव इस भूख हड़ताल का नेतृत्व करेंगे।

ठेकेदारों का सीधा आरोप है कि राज्य सरकार ग्लोबल टेंडर के बहाने बैक डोर (चोर दरवाजे) से बिजली विभाग का 100% निजीकरण करने की तैयारी में है।

“टाटा, अडानी, अंबानी को कौड़ियों के दाम बेचने की तैयारी”

एसोसिएशन और स्थानीय ठेकेदारों ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ की अरबो-खरबों रुपये की सरकारी संपत्ति, उपकेंद्र, ट्रांसफार्मर और लाइनों को गुपचुप तरीके से देश के बड़े उद्योगपतियों (टाटा, अडानी, अंबानी) के हाथों सौंपने का ताना-बाना बुना जा रहा है।

विद्युत ठेकेदार निलेश कुमार वैष्णव ने भावुक होते हुए कहा, “हम स्थानीय ठेकेदार पिछले 50 वर्षों से, पीढ़ी-दर-पीढ़ी धूप और बरसात की परवाह किए बिना छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था संभाल रहे हैं। आज हमें दरकिनार किया जा रहा है। अगर सारा काम बड़ी कंपनियों के हाथ में चला जाएगा, तो हमारे परिवार और हजारों स्थानीय श्रमिक कहाँ जाएंगे?”

आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर, महंगी होगी बिजली!

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इस निजीकरण और ग्लोबल टेंडर का खामियाजा सिर्फ ठेकेदारों को ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आम जनता को भी भुगतना पड़ेगा:

  • महंगी बिजली का झटका: पूरी व्यवस्था बड़ी कंपनियों के हाथ में जाने से आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और कंपनियों के शोषण का शिकार होना पड़ेगा।
  • रोजगार पर डाका: विभाग में हजारों पद खाली होने के बाद भी नियमित भर्ती नहीं हो रही है। अब सब-स्टेशन संचालन, मेंटेनेंस और मीटर रीडिंग जैसे काम ठेके पर देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है।

क्या है विवादित टेंडर में?

विद्युत कंपनी ने फ्यूज ऑफ कॉल, वार्षिक रखरखाव (एनुअल मेंटेनेंस) और वितरण ट्रांसफार्मर, एलटी, 11 केवी व 33 केवी नेटवर्क के ब्रेकडाउन मेंटेनेंस के लिए एक बड़ा एकीकृत टेंडर निकाला है। इतनी बड़ी राशि और कड़ी शर्तों के कारण छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम वर्ग के ठेकेदार इस रेस से सीधे बाहर हो गए हैं।

आंदोलनकारियों की 4 प्रमुख मांगें:

  1. टेंडर पर तुरंत रोक: विवादित एकीकृत टेंडर को तत्काल निरस्त कर स्थानीय ठेकेदारों के साथ बैठक की जाए।
  2. छोटे पैकेज में बंटे टेंडर: टेंडर को छोटे और व्यावहारिक पैकेजों में बांटा जाए, ताकि स्थानीय उद्यमी इसमें भाग ले सकें।
  3. शर्तों में ढील: पात्रता और वित्तीय नियमों को ऐसा बनाया जाए जिससे स्थानीय छत्तीसगढ़ियों को प्राथमिकता मिले।
  4. रोजगार की सुरक्षा: अनुभवी ठेकेदारों और स्थानीय मजदूरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बने।
  5. कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी स्थानीय विद्युत ठेकेदारों और उनसे जुड़े कर्मचारियों से एकजुट होने की अपील की है। कल से शुरू हो रही भूख हड़ताल के बाद छत्तीसगढ़ में बिजली संकट गहराने के आसार नजर आ रहे हैं।

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